Sep 20, 2018
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इलैक्ट्रॉनिक गैजेट्स के एडिक्ट बनते बच्चे

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इन दिनों हम दस में 8 पैरेंट्स की यही शिकायत सुनते हैं कि उनका बच्चा दिन भर मोबाइल, टेबलेट या लैपटॉप पर लगा रहता है। इलैक्ट्रॉनिक गैजेट्स को देखे बगैर खाना नहीं खाता, बिल्कुल एडिक्ट हो चुका है। मगर गीली मिट्टी के समान मन रखने वाले इन बच्चों को यह लत पनप कहां से रही है, कभी सोचा है। हो सकता है कि इस लत के कारण हम ही हों, कैसे आइए जानें।

गैजेट्स में ढूँढ़ता अपनापन-

Teens with Gadget

जानें-अंजाने कई बार हमारी परवरिश में कुछ ऐसी चीज़ें हो जाती हैं जो बच्चों को इलैक्ट्रॉनिक गैजेट्स की ओर ढ़केल देती हैं। जैसे फैमिली प्लानिंग के कारण भाई-बहनों में ज़्यादा अंतर हो जाने पर या फिर पैरेंट्स की सिंगल चाइल्ड की ख़्वाहिश के चलते बच्चा अपने ही घर में अकेलापन फील करने लग जाता है और इसे दूर करने के लिए वह इन गैजेट्स की ओर चला जाता है।

वर्किंग कल्चर-

Technology Addiction

बदलते कल्चर के साथ अब घर में सिर्फ पिता ही नहीं बल्कि मां का नौकरी करना भी ज़रूरी हो गया है। ये एकमात्र शौक नहीं बल्कि ज़रूरत भी बन चुका है। ऑफिस जाते वक्त बच्चों से संपर्क बनाए रखने के लिए उनके हाथ में मोबाइल थामने का पहला कार्य पैरेंट्स द्वारा ही होता है। वीडियो कॉल, वाट्सएप्प या कॉल के ज़रिए वो अपने बच्चों से उनका हाल तो जानते ही हैं साथ ही उन्हें इस गैजेट को यूज़ करने में परफेक्ट भी बनाते हैं।

छोटा परिवार भी है कारण-

Electronic Gadget Addiction in Small Family

माता-पिता दोनों का नौकरी करना उस वक्त बच्चों पर कोई बुरा प्रभाव नहीं डालता था, जब फैमिली ज्वॉइंट हुआ करती थी। दादा-दादी, बुआ, चाचा की देखरेख में बच्चा कभी अकेला फील नहीं करता था। इसके साथ ही बच्चा यदि इकलौता है तो परिवार में रहने वाले सभी चचेरे भाई-बहन के साथ वो अकेलापन कभी महसूस नहीं कर सकता था।

मोबाइल पर सिमटती सोशल लाइफ-

Electronic Gadget Addiction

आज जब हम बड़े ही खुद को समाज से काटने लग गए हैं तो बच्चे तो हमारा ये गुण अपनाएंगे ही। फेसबुक या इंस्टाग्राम के ज़रिए दूसरों की खैरियत जान लेने व कहीं बाहर न निकलने की आदत बच्चों में भी हमें देखकर ही पनपती है। वो पार्क में खेलने की बजाय खुद भी माता-पिता की तरह घर में ही बैठे रहना चाहते हैं और मोबाइल से ही अपनी दोस्ती निभाना चाहते हैं।

पैरेंट्स हैं ज़्यादा एडिक्ट-

Parents Eddicted to Electronic Gadgets

लास्ट बट नॉट द लीस्ट बात ये है कि आज के समय में बच्चों से ज़्यादा पैरेंट्स गैजेट्स के एडिक्ट हैं। ऑफिस से घर आने या छुट्टी के दिन घर के एक कोने में मोबाइल लेकर पड़े रहने की हैबिट को बच्चा देखता है और खुद को उसी प्रकार इस रूप में ढाल लेता है, जिस प्रकार गीली मिट्टी कोई आकार ले लेती है।

 

-निकिता सक्सेना

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