Nov 2, 2018
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बढ़ता जा रहा है डेंगू का खौफ

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इन दिनों डेंगू का खौफ पूरे शहर में फैल रहा है। डॉक्टर, जिसे हम भगवान का रूप समझते हैं, वे हल्की सी बीमारी का डर मरीजों में भांप कर अच्छी खासी रकम वसूल रहे हैं। इस बात की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की सरकारी रिपोर्ट में इस तरह का पर्दाफाश हुआ है।

कई चिकित्सक अपना उल्लू सीधा करने के लिए डेंगू के नाम पर मरीजों को गुमराह कर रहे हैं। जानकारी के लिए हम बता दें कि जिन मरीजों के डेंगू के टेस्ट निजी अस्पतालों से पॉजिटिव भेजे गए, वह सरकारी लैब में फेल हो रहे हैं। पानीपत, अंबाला, करनाल सहित यमुनानगर आदि जिलों में कुछ ऐसा ही हाल है।

गर्मियों के मौसम में तथा बरसात के दिनों में डेंगू का मच्छर पनपता है। जो नवंबर माह तक रहता है। इन्हीं दिनों में सबसे अधिक डेंगू व मलेरिया के मरीज अस्पतालों में पहुंचते हैं। हल्का सा बुखार होते ही मरीज का डेंगू व मलेरिया का टेस्ट कराया जाता है। ‘जान है तो जहान है’ ऐसा समझकर मरीज डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए चिकित्सक की बात मान लेते हैं।

बहुत सारे मरीज सरकारी अस्पताल के अलावा प्राइवेट चिकित्सकों के पास बुखार के इलाज के लिए जाते हैं। मरीजों का डेंगू के नाम पर कार्ड बेस टेस्ट किया जाता है। इसके लिए लैब व निजी अस्पताल मरीजों से फीस वसूलते हैं। जबकि यह सरकार की ओर से मान्य ही नहीं है।

डेंगू की जांच के लिए मरीजों का एक और भी टेस्ट किया जाता है, ‘एलिजा टेस्ट’। लेकिन प्राइवेट चिकित्सक कार्ड बेस टेस्ट करते हैं। जिसमें डेंगू का सही से पता नहीं लग पाता। सरकार के 2020 तक डेंगू रहित करने का लक्ष्य रखा गया है। यही कारण है कि प्राइवेट अस्पतालों व लैंब के जरिए होने वाले डेंगू के टेस्टों की अपनी लैब में जांच करवाता है। यदि सात दिन से बुखार है, तो एनएसआइ किट से जांच होती है। सात दिन से अधिक होने पर आइजीएम किट से जांच होती है। डेगू के टेस्ट की रिपोर्ट आने में भी कम से कम तीन घंटे लगते हैं। जबकि निजी अस्पतालों व लैब में कार्ड बेस जांच कर तुरंत रिपोर्ट बता दी जाती है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 25 हजार तक प्लेटलेट्स रहने तक तो कोई खतरा नहीं है। लेकिन 25 हजार से कम प्लेटलेट्स हों तो चिन्ता की संभावना है और स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि मरीज को एडमिट करने की जरूरत पड़ जाती है। जबकि निजी चिकित्सक एक लाख से भी आधिक प्लेटलेट्स होने पर भी मरीज को अस्पताल में एडमिट करने का सुझाव देते हैं और उनसे डेंगू के नाम से मोटी फीस वसूलते हैं।

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